अजीब दास्ता हे ये ........सतरा साल पुराना भाजपा और जदयू का रिश्ता टुटा
आख़िरकार ....वो समय आ ही ग़या जब नरेन्द्र मोदी के बड़े हुए कद को घटने घटाने का प्रयास हर तरफ़ होना शुरु हो गया हे ....कुछ पार्टी ये कहने से भी नहीं चुक रही हे की मोदी सेकुलर हे जिससे समाज समाज का एक तबका भय में हे .......आज भी हमारे नेता ये समझते हे की एक करोड़ की जनसंक्या से भी ज्यादा वाला ये देश जो ये बोलेंगे वो ही सुनेंगे एक आदमी कैसे समाज के एक बड़े तबके के लिए खतरा हो सकता ......दरशल .....डर और दबाव की राजनीति के बीच हर कोई अपनी अपनी डपली अपना अपना राग वाली कहावत ज्यादा चरितार्थ होती नजर आ रही हे .
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